Friday, 15 October 2021

जिंदगी एक सफ़र



माना कि जिंदगी का सफ़र है जरा मुश्किल
पर डरना नही है तुम चलते रहना ऐ मुशाफिर।

बढ जाती हैं अकसर धड़कन इस सफ़र में
ऐ वक्त तूँ ही बता अब क्या करें गफ़लत में।

जान जाइये इस जीवन की ये काँटों भरी राह
ये जीवन तो समझ लीजिये है समंदर अथाह।

यों मनुष्य कभी लड़खड़ाता कभी चलता भी है
ये दौड़ता है कभी कभी फिर ये सरकता भी है।

मान मत लेना इसे बस सफ़र एक मात्र बेचारा
पूरा ज़रूर करना इसे तुम, ये तो है बहुत प्यारा।

वक्त काट देता है जिंदगी के इस सफ़र को
विश्वास रखो अपने ऊपर, इसे ग़ौर से देखो।

ऐ मुसाफ़िर जिंदगी के इस सफ़र में तूँ चलते रहना
समझ लो ये सफ़र तो है जिंदगी का बस एक गहना।

चलो, सफ़र है ये तो जैसे तैसे बस कट ही जायेगा
पर जरा सोच ऐ मनुष्य अब तूँ किस राह पर जायेगा।

वैमनस्य मत रखना जिंदगी के सफ़र में तूँ कभी
बस अच्छी सोच रखना निकले तूँ चाहे जिधर भी।

आहट पाकर तूँ किसी की, डर न जाना मेरे भाई
लोग मिलेंगे तुझे इस सफ़र में, ढूँढना तूँ अच्छाई।

बैठ न जाना तुम कभी इस सफर में कभी हार मानकर
राहें बहुत कठिन आयेंगी हैरत होगी तुम्हें ये जानकर।

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