2 अक्तूबर के दिन जन्मे
भारत के थे वो अभिन्न अंग।
एक थे गांधी लकूटि संग
आधी धोती था श्वेत रंग।
एक थे लाल बहादुर बृजवासी
नाटी सी थी उनकी क़द काठी।
दोनों थे भारत के सच्चे सपूत
क्या वर्तमान और फिर क्या भूत।
सच्चे थे और अच्छे भी थे वो
अपने प्रण के बडे पकके थे वो।
ठान लिया था कुछ काम करेंगे
विश्वभर मे देश का नाम करेंगे।
एक ने अंग्रेज़ों को ललकारा
अहिंसा का सबको दिया नारा।
अंतरिम संकट को पहचाना
बुन दिया सुदृढ ताना बाना।
बुनियादी ढाँचा मज़बूत किया
गांधी बापू का उप नाम दिया।
महात्मा भी वो थे कहलाये
संपूर्ण जगत में फिर वो छाये।
लाल बहादुर की उपमा देकर
अच्छे अच्छे भी थे अब थर्राये।
महिमा थी उनकी ऐसी कुछ
थे वो कुछ करने के इच्छुक।
सच्चाई से मुख ना मोड़ो
अंग्रेज़ों अब भारत छोड़ो।
सचमुच थे वो बडे महान
जय जवान जय किसान।
यादें जुड़ी हैं दोनों के संग
भारत के थे वो अभिन्न अंग।
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