Sunday, 9 May 2021

कागज - कलम


 कागज कलम से लिखा करते थे

स्याही और दवात हुआ करते थे

सूखने के इन्तजार में मिटटी दाल दिया करते थे

सरकंडे की कलम बनाकर दिन रात लिखा करते थे

 

धीरे धीरे होल्डर आया

सोचा  बदल गयी काया

फाउंटेन पेन की मिली सौगात

भूल गए सब अपनी औकात

कुर्ते की जेब में रखकर तब

कुछ अलग दिखा करते थे

 

लिख देना ही कोई बात नहीं है

क्या लिखा है वो बात सही है

ताकत कलम की इतनी होती

अंग्रेजों की ढीली करदी धोती

 

मुख पत्र में यदि लिख दिया

समझो अपना नाम कर दिया

लेखनी चाहे कोई भी हो

शुद्ध विचार हुआ करते थे

कागज कलम से लिखा करते थे

 

अब बदला जमाना इतना

कम्प्यूटर में इंटरनेट गया

सबको इतना भा गया

गूगल और  फेस बुक पर लिखना

आसान तरीका   गया

 

-बुक   के जरिए  घर बैठे आज

इंसान जगत में छा गया

घर में रहकर दफ्तर का काम

बच्चों ने कर दिया मोबाइल से नाम

 

गूगल इंजन सर्च करेगा

जो चाहो वो मिलेगा

ग्लोबल हो गया इंसान

लिखना हो गया आसान

 

खड़िया से शयामपट पर लिखकर

शिक्षक पढ़ाते थे अक्सर

 अपना काम किया करते थे

कागज कलम से लिखा करते थे

 

इतने कम साधन फिर भी

महाकाव्य लिखा करते थे

नदी के किनारे बैठकर

रामायण और महाभारत लिखे

गध और पध में रचना करते दिखे

 

संशाधन के आभाव में भी

वाद विवाद किया करते थे

मौखिक संवाद हुआ करते थे

आता  नहीं था कुछ ज्यादा

फिर भी उत्तम विचार हुआ करते थे

तुलसी दास और कालिदास सरीखे

विद्वान कलम से लिखा करते थे

 

उस  लिखने का सार अधिक था

सदा जीवन और सत्कार अधिक था

कागज  कलम का वो लेखन

सर्वश्रेष्ठ हुआ करते थे

आधुनिकता ने सब कुछ बदला

कागज कलम हो गया अबला

इंटरनेट से लिखना पढ़ना

समझो हो गया अपना

 

देश विदेश में पढ़ा करे अब

हवाई जहाज से सफ़र करे सब

 नौजवान हट्टे कट्टे हुआ करते थे

  कागज कलम से लिखा करते थे 

 

 

 


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