Saturday, 16 October 2021

चिड़िया का घोंसला

 

कुछ तिनके उठाकर बार बार ला रही थी
चिड़िया शायद अपना घर बना रही थी।

इस वक्त उसे कुछ और नही सूझ रहा था
पेड़ की शाखा पर वो घोंसला दिख रहा था।

फुर्र से उड़ती और कुछ और तिनके ले आई
बहुत मेहनतकश थी वो पूरा आसमां घूम आई।

चिड़िया थी वो, चौंच के सहारे सब कर लेती
पंख थे उसके ग़ज़ब उनमें वो ढेर हवा भर लेती।

एक नया संसार जो बसाना था उसे इस वक्त
उसे तो फैसला लेना था जो था थोडा सा शक्त।

उड़ जाती थी वो फुर्र से जब चाहती तब वो लौटती
कहीं से दाना चुगती तो कहीं से थोडा सा पानी पीती।

परख परख कर तिनका चोंच में पकड कर आये
एक के बाद दूसरा, तीसरा....तिनका लेकर आये।

लो घोंसला भी बन गया, अब अंडे एक दो,तीन,चार
पल पल उन्हें निहारती, चूज़े लायेंगे घोंसले में बहार।

इसी उधेड़ बुन में वो रह रह कर उड़ कर जा रही थी
चिड़िया अब शायद अपना आसियाना बना रही थी।

रावण का रोल

 एक आदमी रावण का रोल कर रहा था

दस सिरों को उठाकर बोझ मर रहा था

आयोजकों ने उसकी ये परेशानी समझी
पाँच मिनट की लघु शंका की छुट्टी करदी

रावण जी लघु शंका के लिये दीवार के नाल खड गये
कुछ देर बाद पता चला की उसके पीछे कुत्ते पड गये

आनन फ़ानन में उसके नक़ली सिर नीचे लुढ़कने लगे
और कुछ कुत्ते रावण की धोती से खींचतान करने लगे

प्रबंधक अब रावण को इधर उधर ढूँढने लगे
देरी होते देख पब्लिक में से कुछ लोग उँधने लगे

इतनी देर में रावण का वह स्टेज पात्र आ गया
पर्बंधक उसकी माली हालत देख घबरा गया

वो बोला रै रावण तूँ कहाँ मर गया था
नालायक़ तूँ तो लघुशंका करने गया था

बोला श्रीमान, बस अब और कुछ मत पूछो
मेरे बाकि सिर तो वो कुत्ते ले गये उन्हें ढूँढो

मैं तो बड़ी मुश्किल से लौट कर आ पाया हूँ
और ये मेरा असली सिर बचा कर लाया हूँ

मेनेजर बोला चलो नये सिर और पड़े हैं उन्हें पहन लो
कुत्ते तो कुत्ते हैं छोड़ो उन्हें अब ये नये कपडे पहन लो

बच गया मैं नहीं तो बेवजह ही मारा जाता
मैं रावण हूँ ये भी कुत्तों को पता चल जाता

तो वो मेरा असली सिर भी उठा ले जाते
मेरे घरवाले मेरा इंतज़ार करते रह जाते

अरे चलो भी अब तुम्हारा रोल आ गया
दर्शकों में थोड़ी देर को सन्नाटा छा गया

वो बेला भई ये संभालो तुम्हारा तामझाम
मैं तो करूँगा अब अपने ही घर का काम

तुम तो जरा सी बात पर बस यों ही घबरा गये
क्या हो गया, कुत्ते कौनसा असली सिर खा गये

तुम तो जनता के सामने बच्चों की तरह शर्मा गये
अरे ! इधर देखो, तुम्हारे लिए नये नो सिर आ गये

मेनेजर के कहने पर वो मान गया
रावण बनने का मतलब जान गया

अगले दिन से वो डरता हुआ सा आया
अब उसे रावण का मतलब समझ आया

Friday, 15 October 2021

जिंदगी एक सफ़र



माना कि जिंदगी का सफ़र है जरा मुश्किल
पर डरना नही है तुम चलते रहना ऐ मुशाफिर।

बढ जाती हैं अकसर धड़कन इस सफ़र में
ऐ वक्त तूँ ही बता अब क्या करें गफ़लत में।

जान जाइये इस जीवन की ये काँटों भरी राह
ये जीवन तो समझ लीजिये है समंदर अथाह।

यों मनुष्य कभी लड़खड़ाता कभी चलता भी है
ये दौड़ता है कभी कभी फिर ये सरकता भी है।

मान मत लेना इसे बस सफ़र एक मात्र बेचारा
पूरा ज़रूर करना इसे तुम, ये तो है बहुत प्यारा।

वक्त काट देता है जिंदगी के इस सफ़र को
विश्वास रखो अपने ऊपर, इसे ग़ौर से देखो।

ऐ मुसाफ़िर जिंदगी के इस सफ़र में तूँ चलते रहना
समझ लो ये सफ़र तो है जिंदगी का बस एक गहना।

चलो, सफ़र है ये तो जैसे तैसे बस कट ही जायेगा
पर जरा सोच ऐ मनुष्य अब तूँ किस राह पर जायेगा।

वैमनस्य मत रखना जिंदगी के सफ़र में तूँ कभी
बस अच्छी सोच रखना निकले तूँ चाहे जिधर भी।

आहट पाकर तूँ किसी की, डर न जाना मेरे भाई
लोग मिलेंगे तुझे इस सफ़र में, ढूँढना तूँ अच्छाई।

बैठ न जाना तुम कभी इस सफर में कभी हार मानकर
राहें बहुत कठिन आयेंगी हैरत होगी तुम्हें ये जानकर।