Saturday, 8 May 2021

चाँद किसी का हो गया



सुना है चाँद बादलों के आग़ोश में
जाकर सो गया
देखने की बात ये है कि
दिनभर कहाँ था जो सो गया

इरादे नेक नहीं लगते इसके
देखो ये इसको क्या हो गया
ज़ालिम दग़ाबाज़ निकला ये तो
यों ही किसी का हो गया

साफ़ दिखता है इसके चेहरे से
ये तो सुप्त हो गया
मुआ शुरू मे तो ठीक लगता था
बादलों के सानिध्य मे जाकर
लगता है कही खो गया

चश्मदीद गवाह कौन है इसका
ऐसे कैसे किसी का हो गया
रपट लिखवाना पड़ेगी
ये भी अब सिर फिरा हो गया

घटों निकला ही नहीं बाहर
अंदर ही अंदर इसे क्या हो गया
तारों मे सुगबुगाहट हुई
उनकी आपात एक सभा हुई

सप्तर्षि तमतमाया
वह आपे से बाहर हो गया
बादलों ने उसे जगाया
बोले, “जाओ बाहर
देखो क्या तमाशा हो गया

चाँद हड़बड़ी में निकला
उसे बादलों से मोह हो गया
मुस्कुराया बस यों ही
देखते ही देखते सराबोर हो गया

तसव्वुर ही है उसका ऐसा
जहाँ गया वही का हो गया
तारे दुम दबाकर भागे
क्या करते वो अभागे

आसमान फिर से सदा बहार हो गया
तारों से अब वो मुख़ातिब हो गया
चाँद थोड़ा सा थक गया था
इसलिये शायद वो सो गया